आज दिनांक 26 अगस्त 2020 को हड़ताल के 31 वें दिन झारखंड राज्य मनरेगा कर्मचारी संघ की मांगों के समर्थन में देशभर के मनरेगा कर्मचारी महासंघ द्वारा दो दिन 26-27 अगस्त को कार्य बंद रखा गया है। पाकुड़ जिला संघ द्वारा हड़ताल अवधि की समीक्षा के दौरान जिलाध्यक्ष अजीत टुडू ने कहा कि कांग्रेस सरकार चलाई गई मनरेगा जैसी महत्वाकांक्षी योजना को जिस प्रकार एक अधिकारी द्वारा झूठे आंकड़ों के सहारे पेश किया जा रहा है वर्तमान मंत्रियों को उनकी मंशा समझना चाहिए।
हड़ताल अवधि में जिस प्रकार मनरेगा आयुक्त द्वारा दावा किया गया कि JSLPS एवं सामाजिक अंकेक्षण दल के सहयोग से मजदूरों को कार्य उपलब्ध कराया जा रहा है तथा औसतन प्रतिदिन 100-150 मजदूर कार्य कर रहे हैं। इस संबंध में मैं मीडिया बंधु के माध्यम से माननीय ग्रामीण विकास मंत्री जी को आनलाइन आंकड़ों से अवगत कराना चाहूंगा। पूरे राज्य में औसतन 100 मजदूर प्रति पंचायत डिमांड पर 4176 पंचायतों में प्रतिदिन 417600 मजदूर कार्यरत होंगे तथा 26 दिनों में 1 करोड़ 08 लाख 57 हजार 6 सौ मानव दिवस सृजन होंगे। हड़ताल के पूर्व माह जुलाई 2020 के मानव दिवस सृजन को देखा जाय तो यह आंकड़ा 94 लाख 52 हजार है जबकि हड़ताल अवधि अगस्त माह के 26 दिनों का मानव दिवस सृजन मात्र 27 लाख 21 हजार है।
औसतन डिमांड के विरुद्ध मानव दिवस का सृजन यदि देखा जाय तो मनरेगा आयुक्त के द्वारा किए जा रहे गुमराह को मंत्रीजी समझ सकते हैं। मनरेगा कर्मियों पर हमेशा दबाव बनाकर कार्य लिया जाना, योजना एवं कर्मियों को जनता के समक्ष तोड़ मरोड़ कर पेश किया जाना मनरेगा आयुक्त की ग़लत मंशा जाहिर करती है। आज के समय में कोई भी योजना इतना जटिल नहीं है जितना मनरेगा योजना को बनाया गया है। वर्तमान में संक्रमण के समय यही योजना गांव में संजीवनी का काम कर रही है जिसे मनरेगा आयुक्त बर्बाद करने पर आमादा है।

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